विकसित भारत की नीव है महिला
भारत का स्वर्णिम गौरव है महिला
हौसलों से होगा रोशन उनके हर मुकाम
देश की प्रगति का सबसे बड़ा प्रमाण है महिला
जिसने अपनी खुशियाँ त्यागीं,
माँ बनकर देती है जन्म हमको,
सौंप दी हर ख़ुशियाँ हमको
फिर क्यों रखते हैं हर अवसर से वंचित उनको?
नारी सिर्फ़ एक जाति नहीं,
अन्नपूर्णा की पहचान है वो।
है देवी, वो है लक्ष्मी,
है काली का रूप भी वो।
बेटी बनकर आँगन महकाती
बहन बनकर रिश्ते निभाती
हर रूप में खुशियाँ लुटाती
फिर क्यों उसकी उड़ान रोक दी जाती?
है दम उसमें कुछ करने का,
है जज़्बा उसमें आगे बढ़ने का।
है दम उसमें इस रूढ़िवादी समाज का रुख़ बदलने का
कमज़ोर कहकर जिसको,
ठुकरा देता है जग सारा,
हर परिस्थिति में देती है वो,
हँसकर साथ हमारा।
खुद दर्द सहकर भी अक्सर,
चेहरे पर मुस्कान सजाती है,
टूटे जब हौसले हमारे,
वही हमें फिर से उठाती है।
सम्मान मिले हर नारी को,
यही उसका अधिकार है।
जो करें अपमान नारी का,
धिक्कार उस सोच पर बार-बार है।
नारी का सम्मान जहाँ
वहीं सच्चा समाज है।
उसके अधिकारों की रक्षा करना,
हर व्यक्ति का फ़र्ज़ है।
- तनय त्रिपाठी
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