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मेरे पिता — भोले

                
                                                         
                            "मेरे पिता — भोले"
                                                                 
                            

वो दर्द छुपाकर हँसते रहे,
हमको खुशियों में रखते रहे,
खुद धूप में जलते रहे मगर,
हम पर छाँव किए चलते रहे।

रिश्तों की हर उलझी डोर को,
वो चुपचाप सुलझाते थे,
अपनों के ताने सहकर भी,
हर रिश्ता दिल से निभाते थे।

उनकी खामोशी भी कहती थी,
मन में कितना कुछ चलता है,
पिता का मन भी रोता है,
बस आँसू बाहर नहीं आता है।

किसी को राह में रुकता देखा,
तो खुद भी वहीं ठहर जाते थे,
दूसरों के हिस्से की मुश्किल को,
अपने हिस्से में कर जाते थे।

करुणा उनके मन में जैसे,
निर्मल गंगा बहती थी,
जिसने भी माँगा हाथ कभी,
उनकी मुट्ठी खाली न रहती थी।

ईमानदारी उनका आभूषण,
सत्य उनका श्रृंगार रहा,
विपदाओं के बीच भी उनका,
सिद्धांतों पर अधिकार रहा।

उन्होंने मुझसे इतना ही कहा—
“बेटा, नेक बने रहना,
दुनिया चाहे भूल जाए तुझको,
तू किसी का हक़ मत हरना।”

कभी मेरे संग बच्चे बनकर,
आँगन में वो खेला करते,
कभी मेरी छोटी-सी बातों को,
घंटों बैठकर सुना करते।

मैं चुप रहता, वो पढ़ लेते,
आँखों में मेरे भाव सभी,
पिता थे लेकिन मित्र से बढ़कर,
समझते थे मेरी बात सभी।

जीवन के कितने विषयों पर,
हम दोनों बातें करते थे,
मैं उनकी दुनिया समझता था,
वो मेरी दुनिया पढ़ते थे।

मेरी उलझन, मेरी जिज्ञासा,
हर प्रश्न को मान दिया,
पिता होकर भी उन्होंने,
मेरे विचारों को स्थान दिया।

जब पहली बार मंच पर चढ़कर,
मेरी आवाज़ थर्राई थी,
पीछे से उनकी आँखों ने ही,
मेरी हिम्मत बढ़ाई थी।

शब्द मेरे थे, स्वर मेरा था,
पर साहस उनका था,
उस दिन मंच पर खड़ा हुआ मैं,
पर विश्वास उनका था।

मेरे सपनों को पंख दिए,
अपनी इच्छाएँ भूल गए,
मेरी राह सँवारते-सँवारते,
कितने मौसम खुद झेल गए।

अपने सपनों को पीछे रखकर,
मेरे सपनों को सींचा है,
मैं आज जहाँ भी पहुँचा हूँ,
उनके हाथों ने खींचा है।

मेरी हर छोटी जीत में,
उनकी आँखें चमक उठीं,
मेरी हर एक हार के आगे,
उनकी बाँहें ढाल बनीं।

वो पिता नहीं, वो प्रार्थना हैं,
वो विश्वासों का आकाश हैं,
मेरे जीवन की हर अच्छी बात में,
उनके संस्कारों का प्रकाश है।

मैं शब्द कहाँ से लाऊँ ऐसा,
जो उनका उपकार लिख सके,
जिस मिट्टी से मेरा अस्तित्व बना,
क्या कोई उस आधार को लिख सके?

बस इतना कहना है उनसे—
जब तक साँसें चलती रहें,
मेरे भीतर आपके संस्कारों की,
ये ज्योतियाँ जलती रहें।

आपने मुझे जो नाम दिया,
उस नाम की लाज रखूँगा,
आपका बेटा हूँ—इस सत्य को,
हर जन्म में फिर से कहूँगा।

आप मेरे पिता ही नहीं,
मेरे जीवन का सार हैं,
मेरी हर धड़कन में बसते,
मेरे प्यारे पिताजी, मेरे संसार हैं।

मेरे पिता, मेरे गुरु भी हैं,
मेरे सच्चे मित्र भी हैं,
जीवन की इस लंबी यात्रा में,
मेरे सबसे सुंदर चित्र भी हैं।

और अंत में बस इतना कहूँ—
मेरी सबसे सुंदर पहचान हैं आप,
मेरे पिता, मेरे गुरु, मेरे मित्र—
मेरी दुनिया, मेरा अभिमान हैं आप।

नाम आपका “भोले” है,
पर हृदय में पूरा संसार लिए,
और मैं आपका “तनय” हूँ—
आपके संस्कारों का विस्तार लिए।

अगर मुझमें कुछ अच्छा है,
तो वो आपकी ही निशानी है,
“भोले” मेरे पिता हैं—
और यही मेरी सबसे बड़ी कहानी है।
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5 घंटे पहले

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