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क्या क्लास थी दसवीं !!

                
                                                         
                            क्या क्लास थी दसवीं ?
                                                                 
                            

जब हम नए-नए दसवीं में आए,
सब पढ़ते थे मुँह लटकाए।
सबने सोचा सब कुछ पढ़ लेंगे
और रिजल्ट में अपना नाम कर देंगे।
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पर फिर दिमाग में एक ख्याल आया,
जिसने कर दिया टैंशन का सफाया।
हमने सोचा एक बार ॥
अगली साल तो हो जाएँगे सब दूर यार ।
फिर से चालू मस्ती मौज,
पर पढ़ाई भी करते थे हम रोज।
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इस क्लास ने पहला नाम बनाया,
जिसमें पहली बार पढ़ने में भी मज़ा आया ॥
खूब टीपा - खूब टिपाया और,
टैस्ट में खूब भी पिटे और पीछे वाले को भी पिटाया।
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भूल से गए थे हम खौफ इस क्लास का,
जो हमें पहले प्री-बोर्ड ने याद दिलाया।
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फिर से चालू पढ़ाई-लिखाई,
कम कर दी अब मौज और मस्ती की लड़ाई।
सबके मन में फिर से टैंसन आई,
अब सब करते दिन-रात पढ़ाई ॥
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ऐसे करते-करते सर्दी भी आई ;
और अब होने लगी हमारी खूब पिटाई।

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सर्दी में टीचर के डंडे के मूड ने हमारे हाथों को खूब सताया,
पर बैंच के नीचे छिपे ठंडे-ठंडे पाईप ने सारा दर्द दूर भगाया।
ऐसे करते-करते इस क्लास से पीछा छुड़ाया,
और गलती से मैं 90% से पास होके आया।
कुछ दिन तो बड़ा मज़ा आया,
पर अब हमें एक तूफान ने खूब सताया।
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अब हम ग्यारहवीं में आएँगे,
और क्लास के ये सारे भाई अलग-अलग हो जाएँगे ॥
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जिंदगी में पहली बार जैसा सोचा वैसा ही परिणाम आया,
नए सैसन के पहले दिन में ही दोस्तों की याद ने खूब सताया,
और आज की क्लास में किसी को भी बिल्कुल मज़ा नहीं आया ॥
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सब आज बस बोर्ड की तरफ देखकर दूसरे कमरे में बैठे अपने
दोस्त के बारे में सोच रहे थे और,
मन ही मन नई क्लास को खूब कोस रहे थे ॥
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अब कुछ दोस्त तो पड़ोसी हो गए और,
कुछ तो पढ़ने के लिए बड़े शहर के हो गए ॥
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कुछ दिनों में शायद सब एक दूसरे को भूल जाएँगे और,
बस कभी-कभी ही अपने पुराने यार को याद कर पाएँगे,
पर सच में यार ये दिन फिर कभी नहीं देख पाएँगे ॥
-स्वास्तिक यादव
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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