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ज़िंदगी को ज़रा सादा ही रखिए

                
                                                         
                            ज़िंदगी को ज़रा सादा ही रखिए,
                                                                 
                            
दिल से हर बोझ को हल्का ही रखिए।
दौलतों से नहीं मिलती है राहत,
अपने किरदार को ऊँचा ही रखिए।
वक़्त जब इम्तिहाँ लेने पे आए,
हाथ अपनों का थामे ही रखिए।
रंज़-ओ-ग़म आएँ तो घबराइए मत,
हौसलों का दिया जलता ही रखिए।
दूसरों के लिए जीना भी सीखें,
दिल में इंसाँ का जज़्बा ही रखिए।
नफ़रतों से कभी घर न सजेंगे,
प्यार का इक दिया रौशन ही रखिए।
योग हो या दुआ, जो भी हो मुमकिन,
जिस्म-ओ-जाँ को सदा तंदुरुस्त रखिए।
जब किसी पर मुसीबत की घटा हो,
उसके हक़ में भी दामन ही रखिए।
फ़र्क़ मज़हब का दीवार न बन पाए,
रिश्तों का सिलसिला ज़िंदा ही रखिए।
कम में जीने का भी इक फ़न है यारो,
ख़्वाहिशों को ज़रा छोटा ही रखिए।
लोग याद उसको ही करते, 'बाबरा'
जो सभी के लिए दिल को ही रखिए।

 
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2 महीने पहले

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