दुनिया बता मुझे कि समझदार कौन है
ज़िंदा है ख़बरें बेच के अखबार कौन है
जग को नचा रहा छिपा क़िरदार कौन है
वो सामने भी है नहीं सरदार कौन है
हमने किए कबूल गुनाहों को आज फिर
मंदिर चुराई चीज का हक़दार कौन है
बाहर से आ गए जो बिन-बुलाए आदमी"
नकली समान संग गिरफ़्तार कौन है
रहबर नहीं मिला हमें जो पूछते पता
मीलों जो छूटता रहा घरबार कौन है
लालच की चाशनी में सभी डूबे लोग हैं
राहत की रौशनी का तलबगार कौन है
जग को नचा रहा छिपा क़िरदार कौन है
माटी की गंध बेचनाआता नहीं सुशील
बैठे हैं रहगुज़र ये खऱीदार कौन है
दुनिया बता मुझे कि समझदार कौन है
ज़िंदा है ख़बरें बेच के अखबार कौन है
-सुशीलयादव
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X