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दिल -ए -नाँदा अभी डर जाएगा

                
                                                         
                            दिल -ए -नाँदा अभी डर जाएगा
                                                                 
                            
ना मिला साथ तो मर जाएगा

आशियाना कहीं मिल के हमने
जो बनाया है बिखर जाएगा

और मुझको भुला देते तुम भी
जख्म मेरा कहीं भर जाएगा

शाही फरमान निकाला ऐसे
हर मुसाफिर ही सिहर जाएगा

अब बढ़ा दो कहीं उलझन ज्यादा
वो जरा नीचे उतर जाएगा

अश्क मुझको भी सुखाने होंगे
नींद ख्वाबों में ठहर जाएगा

वो खफ़ा हम से है जानूं मै भी
हो के नाराज किधर जाएगा

इस बहाने कभी मिल भी लेते
गर इसी राह गुजर जाएगा

आँख भर आती है बातें सुन के
कल ये चेहरा भी सँवर जाएगा
-सुशीलयादव
 
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2 महीने पहले

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