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जमीं और तुम

                
                                                         
                            दरियाओं से बेहतरीन कोई नजरा
                                                                 
                            
गिरती हुए बूंदों ने हमको पुकारा

जमीं से आसमां तक धूल ही धूल
गिरी हुई बूंद ने किया इशारा

धरती निकली आसमां को चूमने जब
बादल बोल गए बीच में हक़ हमारा

रुसवाईयों की बदौलत पाताल में धंसी धरती
लौटा नहीं फिर वो जमीं आसमां का नजारा

'ग़ाफ़िल' हम भी तो थे इस धरा के दो फूल
इस जमाने को पता लगा क्या हुआ हमारा ।

सुसिल ग़ाफ़िल
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2 वर्ष पहले

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