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वक़्त और जिंदगी

                
                                                         
                            वक़्त
                                                                 
                            
एक वक़्त , वक़्त से मुलाकात हुई ,
ज़िंदगी साथ थी ,इसलिए कम बात हुई,
कहते है सब बुरा भला ,
किसी का किसी पर न चला ,
कर्म ,भाग्य ,नक्षत्र और ईश्वरीय अनुकम्पा
इन्ही की है विशेष भूमिका ,
कमियां छिपा ,समय को कोसना,
कायराना और दोगली वारदात रही ,
एक वक़्त , वक़्त से मुलाकात हुई .........

हाल -ये -मुसीबत कहूँ किससे ,
हारती जिंदगी वक़्त फिसला कैसे ,
ख्वाइसे बचपन की जो पूरी करने निकलूं ,
साँसे ,मिन्नत मांगती लगती वक़्त से ,
मै , मै को गर लू पहचान ,ना हो रार इसकी ,
खूबसूरत हो हर लम्हा जिंदगी का ,रजामंदी हुई इकरार भी ,
एक वक़्त , वक़्त से मुलाकात हुई ,
ज़िंदगी साथ थी ,इसलिए कम बात हुई II
 
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2 महीने पहले

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