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आशंकाएं

                
                                                         
                            सदा मैं रहती डरी डरी सी ,
                                                                 
                            
और सोचती ऐसा ।
आने वाले कल में जाने ,
जीवन होगा कैसा ?
खुशियों के सब फूल खिलेंगे ,
या ग़म के होंगे कांटे ?
जाने ईश्वर मेरी झोली में ,
मुझको क्या है बांटे?
पापा की मैं रानी बनकर,
सदा रही इस घर में।
ना जाने क्या होगा मेरा ,
हाल भला उस घर में ?
ढेरों आशंकाएं लेकर,
विदा हुई बाबुल से।
नया देश था ,नया वेश था,
यहां पे सब था तुमसे ।।
तुमने ढेरों रंग सुनहरे ,
मेरे जीवन में भर डाले।
आशंकाएं फीकी कर दीं ,
भगा दिए डर सारे ।।
आज मेरे जीवन का हर पल ,
बस तुमसे ही है उजियारा ।
तुममें ही अब जान बसी है,
तुमसे ही जग लगता प्यारा ।।
यही प्यार सम्मान हमेशा,
मुझको देते रहना जी ।
तुम मेरे हो सदा रहोगे,
सदा प्यार से कहना जी।।
-सुषमा बडोला
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3 महीने पहले

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