अगर तुम दर्द को सिर्फ़ आँसुओं से पहचानते हो,
तो अभी नादान हो।
मेरी तो पूरी जवानी दर्द में हँसते-हँसते गुज़र गई।
— सूर्यांश रीतमा
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