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जनता भूखी है

                
                                                         
                            जनता भूखी है करते नेता जलपान
                                                                 
                            
आवश्यकता होने पर होते नतमस्तक
और होते लाचार

लोकतंत्र हुआ बेहाल
मचा है हाहाकार

जनता की कब होगी सुनवाई
होगी कब कार्यवाही

बड़े-बड़े लोगों का है यह दफ्तर
होते भी काम बड़े बड़ों के यहां

जनता केवल मत की भागीदारी है
सत्ता सुनती रसूखदरो सुनवाई है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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