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अंधा जातीय संग्राम

                
                                                         
                            हर कर्मकांड के लिए पंडित जी को बुलाते है
                                                                 
                            
स्वयं पोथी पत्रा शास्त्र गीता क्यों नहीं उठाते हैं
शिक्षक का कर्म का अधिकार अब नहीं है
पूजा संकल्प भी सीख लो प्रतिकार तो नहीं है
वैश्य का कर्म भी तो हर किसी ने सीखा है
पुलिस सैन्य व्यवस्था ही क्षत्रिय सरीखा है
सेवा में कौन से वर्णक्रम के शूद्र ही अब जाते है
अच्छे अच्छे बाभन ठाकुर नालियाँ सफाते हैं
फिर ये जात पाठ का खेल किसने खेला है
संविधान से राजनीति तक जाति का झमेला है
इंसानों को दी गालियाँ बस सवर्ण ही इल्जाम है
देवी देवता भी न बचे ये अंधा जातीय संग्राम है ||
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33 मिनट पहले

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