वक्त बे- वक्त
आओ वक्त बे-वक्त पर
पते की बात करें,
बे-वक्त आते विकारों की
बयार की बात करें।
पढ़ने के वक्त बाल श्रम में
पिसते नौनिहालों की
बात करें।
वक्त बे-वक्त सुविधाओं के
उपभोग से व्याप्त
दुविधाओं की बात करें।
वासना ऑ मत्सर की
वक्त बे-वक्त बजती
शहनाई की बात करें।
आओ इंसा की इंसा पर
बेवजह शासन करने की
फितरत की बात करें।
सियासत की बिसात
पर हाथ जोड़े खड़ी
वक्त बे-वक्त जनता
जनार्दन की बात करें।
आधी आबादी के हक
को वायदों की,
नक्कारखाने में बजती
तूती की बात करें।
युद्ध हथियारों आतंक
की वक्त बे-वक्त की
धौंस की बात करें।
आओ महाशक्तियों की
बेवक्त मधांधता और
युद्ध की उन्मादता की
बात करें।
युद्ध आतंक ऑ
विस्तारवाद की बेवक्त
तुरही की तान की
बात करें।
आओ इस संसार में
अमीर देशों की
धरती और पर्यावरण
को वक्त बे-वक्त
गरमाने और प्रदूषित
करने की बात करें।
-सूर्य कांत शर्मा
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