आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सत्य की राह

                
                                                         
                            सत्य की राह
                                                                 
                            

सत्य की राह के
बटोही,
पहले बाट को
जान ले।
धैर्य और सत्य को ले
फिर संयम की गठरी
बांध ले।

सत्य की राह कोई
नंदन वन की सैर
नहीं,
यम नियम योग और
अनुशासन को आत्मसात कर ले।

ओ सत्य की राह के बटोही,
एकला चलो रे की
टेर साध ले।

लीक से हटकर
चलना होगा,
शिकवे शिकायतों का
मर्म भी समझ ले ।
अपने पराए के भेद को जान ले
सत्य असत्य की पहचान कर ले।

सत्य की राह
माना के दुर्गम है
आत्मा के परिष्कार का
साधन यही,
नचिकेता की मानिंद
इस पथ के आनंद
जान ले।
दुनिया ऑ उसके
तिलस्म की पहचान
करके,
फिर पुनः तो
सत्य राह की बाट जान ले।

सत्य की डगर कठिन है,
पर इसकी मंज़िल सुहानी है,
बस तू इस तथ्य को समझ ले।
सत्य की राह पर जो चला,
वही तो इंसानियत की
पहचान बना,
नहीं तो गांधी,गौतम,
महावीर,सुकरात का
इतिहास जान ले ।
-सूर्यकांत शर्म
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
48 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर