सत् चित्त आनंद
जीवन ज्यों - ज्यों आगे बढ़ता
अतीत त्यों- त्यों पीछे जाता।
सही कहा है,
अतीत तो छाया है
जैसे ये काया है।
वर्तमान ऑ भविष्य
जीवन जब बढ़ता जाता,
पीछे -पीछे बहुत
कुछ पीछे ही पीछे,
अतीत सा छूटता जाता,,
अतीत सा पीछे छूटता जाता।
हंस है कि अनंत अनादि
सत् चित्त आनंद में समोने
को
उड़ता जाता बढ़ता जाता।
-सूर्यकांत शर्मा
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