मोबाइल की शहनाई
हसीन मोबाइल की
शहनाई
छीन रही पढ़ाई की
लुनाई।
स्क्रीन पर दौड़ रहीं
उंगलियाँ ,
आंखों में तैर रही
कितनी-कितनी
कामनाओं से
आशनाई।
छीन रही एकाग्रता
हो रही गुम- सम
कलम की रौशनाई।
छीन रही सकून भरी
नींद
ख़त्म हो रही ख़्वाबों
ख्यालों की तन्हाई।
हर कोई ले मोबाइल
कोने कोने पर बैठा
लिए श्मशान से
वैराग्य सी लुनाई।
संवादों-संवेदनाओं
औ संबंधों की हो
रही बस अब
अंतिम विदाई।
सूर्यकांत शर्मा
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