मिटने की जिद में,,,,
कल ज़िंदगी से मुलाकात
हुई
आज मौत से बात हुई।
जीने की जिद में
इन दोनों से बहस हुई।
एक जिलाने की जिद पर
एक जलाने की जिद पर
पर थीं दोनों की दोनों
अपनी बात पर आमादा।
मिटने की जिद में
ज़िंदगी ने भी अपनी
कही
सारे गिले शिकवे तो
ज़िंदगी से होते हैं।
फरियाद होती है
उम्मीद होती है।
मौत ने भी इस बत कही
में अपनी बात कही।
सारे के सारे दुख दर्द
गिले शिकवे,
ज़ुल्म ओ सितम।
शैतान हो या फरिश्ते
मेरे दामन में सिमटते हैं।
अ ज़िंदगी तुम से
ये मसले कहां
सुलझते हैं?
ज़िंदगी ने नीले आसमां
की जानिब देखा और
मिटने की जिद में
फिर अपनी बात कही।
मेरे दामन में दुख दर्द
गुरबत,जुल्मों सितम
सभी सही।
पर इल्में सीना ऑ इल्में
सफीना भी मेरे दामन में हैं।
अब बता,
तेरे दामन में
मुझ से ज़ियादा
और क्या है,?
बता तो सही
बता तो सही।
आपका मित्र
-सूर्यकांत शर्मा
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