मौत के बहाने,,,
मौत के आगोश में
जाने के,
कुछ तो बहाने होंगे।
कभी ज़िंदादिल तो
कभी टूटे दिल के
अफ़साने होंगे।
कभी हालात ए मजबूरी,
तो कभी संगदिल ज़माने
के तानें होंगे।
कभी ज़िंदगी की
बेरुखी,
तो कभी
मौत मुबारक के
बहाने होंगे।
कभी जफ़ा का
खंज़र
वफ़ा की मार्फत ए
मयकशी के बहाने
होंगे।
कभी मुहब्बत को
इबादत की मानिंद
मानने वालों को
इल्ज़ाम की शमशीर
से सपुर्द-ए -ख़ाक
करने के बहाने होंगे।
-सूर्यकांत शर्मा
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