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जाकी रही भावना जैसी

                
                                                         
                            जाकी रही भावना जैसी ,,,
                                                                 
                            
जाकी रही भावना जैसी
जीवन छवि देखि
तिन वैसी।

जिनके सरल सुभाषित
पावन जीवन,
नवधा भक्ति सत्संग
संजीवन।

सात्विक भोजन सुसभ्य विचारा
ऐसो जन्म ना
मिले दोबारा।
राम सिया राम
सिया राम
जै जै राम।

जिन हर सिमरे
आठों पहर
उनके जीवन
सुधरे गहरे।
कर्म प्रधान,
रहे बस मानव
होगा सुंदर
जीवन यापन।

वेद पुराण शास्त्र
जतलाया
तिस पर भी
मानव न समझ
पाया।
सबकी सेवा
प्रभु का वंदन
जीवन होगा
नंदन कानन।

इंद्रियाँ शमनित
विचार दमनित
मनभावन होगा
आत्मिक चिंतन।

जग में रह कर भी
संत सा जीवन
गर मिले राम नाम
का संजीवन।
जाकी रही भावना जैसी
जीवन छवि देखि
तिन वैसी।
आपका मित्र
-सूर्य कांत शर्मा
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एक घंटा पहले

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