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बीज का स्वप्न

                
                                                         
                            बीज का स्वप्न
                                                                 
                            

सृष्टि के ओर छोर से
चलता रहा है
बीज का स्वप्न।
प्रारब्ध से पुरुषार्थ तक
वर्तमान से भविष्य तक
यही यक्ष प्रश्न है
बीज का स्वप्न।
जीवन से मृत्यु
मृत्यु से पुनः जीवन
से भी परे है
बीज का स्वप्न।
कर्म और भाग्य की
वो दूर अनंत में
कहीं उस दैव की
कार्मिक जुगलबंदी
का फल है बीज स्वप्न।

बीज से बरगद
बरगद से बीज
एक पड़ाव।
या फिर
एक यात्रा
नहीं नहीं नहीं
अनंत यात्रा है
बीज का स्वप्न।

इस जहां से उस जहां
के बीच का पुल है
यही बीज का स्वप्न।

ज्ञान ऑ विज्ञान का
दर्शन ऑ अध्यात्म का
है बीज का स्वप्न।
सनातन संस्कृति
जनमानस का सत्य है
बीज का स्वप्न।
-सूर्यकांत शर्मा
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3 महीने पहले

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