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अपने होने का अर्थ

                
                                                         
                            अपने होने का अर्थ
                                                                 
                            

अपने होने का अर्थ याद कर,
आज नचिकेता फिर याद आए।
अपने होने के अर्थ फिर ढूंढते
इसी भू पर आए।

धर्मराज के उपदेश
औ तत्व ज्ञान को
परखने,
समय के रथ पर
इसी भू पर आए।

देखे जो धरा के
नज़ारे,
हतप्रभ से रह गए
बेचारे।
अब न तप
न अब जप
बस लालसा ही
लालसा का स्वप्निल
संसार,
भूल गए धरा पर
नचिकेता भी अपने
होने का अर्थ!!!

गाय,दान,धर्म,
सब कुछ अहम ऑ वहम
दुराचारी ही समर्थ।
सनातन संस्कृति का
देख हाल,
तिस पर अयोध्या के
रामलला मंदिर पर
लालच की चाल।
भक्त के वेश में
दानव सा दावानल
ठोंक रहा कालनेमी
ताल।
नचिकेता कुछ सकुचाए
कुछ भरमाए
और लजाए।
फिर से लौट गए
उसी लोक में
अर्वाचीन सांस्कृतिक
काल में।
पूछ्ने आप्तकाम से
अपने होने का अर्थ
जीव ऑ परमात्मा के होने
के अर्थ?
-सूर्यकांत शर्मा
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3 महीने पहले

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