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अधूरी पढ़ी किताब

                
                                                         
                            अधूरी पढ़ी किताब,,
                                                                 
                            

इसने,मैंने,तुमने, सबने,
ज़िंदगी की पढ़ी
अधूरी किताब।

वेद,पुराण,उपनिषद
शास्त्र होंगे
ज्ञान के भंडार
तिस पर भी पढ़ी
गई बस अधूरी किताब।

मन -आत्मा
प्रारब्ध - पुरुषार्थ
अर्थ-काम- मोक्ष
सभी पढ़े - गुने गए
पर पढ़ी अधूरी किताब ।

राग- विराग
भक्ति- दर्शन और
अध्यात्म
तिस पर भी
अधूरी पढ़ी किताब।

दान -पुण्य
यम - नियम
आसन और प्रणायाम
फिर तूने अधूरी पढ़ी
किताब।

जन्म - पुनर्जन्म
बीज -बरगद
सभी देखे खंगाले
बस तूने अधूरी पढ़ी किताब।
ईश्वर,अल्लाह,
वाहे गुरु औ यीशु
फिर भी रहे पंथ
के साथ
बात वही
अ गाफ़िल
अधूरी पढ़ी तूने
किताब।

प्रेम -प्यार
राग -द्वेष
सारे के सारे
जानें और भोगे तूने
फिर भी तूने अधूरी
पढ़ी किताब।

नव रस - नृत्य
कला के खोजे
सारे के सारे आयाम
तिस पर भी
अधूरी पढ़ी तूने
मैने सबने किताब।

जीवन वीथि पर
चलते चलते
चारों आश्रम में
किए निवास
और पाए अनुभव अपार,
पर क्या तुम पढ़
पाए वही अधूरी
जीवन किताब।
आप्त काम के
अंश हम,
हमीं आत्मा
हमीं परमात्मा
पर सारांश में
क्या हम तुम
पढ़ पाए वही
अधूरी एक किताब?!

सूर्यकांत शर्मा
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2 महीने पहले

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