आँसुओं का मोल
कौन जानें
कैसे जानें
आँसुओं का मोल।
वही जानें
जिन्होंने कभी
चुकाया हो
आँसुओं का मोल।
प्रेम और विरह की
अग्नि को सौंप दिया
हो जीवन का मोल।
संवाद- संवेदनाओं
के संबंध को लिया
हो तोल।
कर्ण ने कवच कुंडल
दान से,
राजपूत ललनाओं ने
अपनी आन - बान - शान
से जौहर कर
समझ लिया था,
आँसुओं का मोल।
साहिर ने भी माँ
के संघर्ष से
आधी आबादी की
भाव भंगिमाओं से
जान लिया था
आँसुओं का मोल।
तपती गर्मी में
बेहाल भूख से
बिलखते मानव
ने जान लिया है
आँसुओं का मोल।
नौकरी की तलाश में
परदेस जाते
बदहवास से
पथिक ने जान दिया
आँसुओं का मोल।
धुंधली सी जीवन की
पगडंडी से
आया तू समझता
आँसुओं को मोल।
और अब तू स्वार्थ
के मोतियों से
अमीरी के स्वांग से
उसी की दया को
रहा तोल।
यूं तो तू स्वयं को
कहता ग़लतियों
का पुतला,
फिर भी तू
कभी नहीं संभला।
अब तो इस जीवन
की वेला में
समझ ना
आँसुओं का मोल।
-सूर्यकांत शर्मा
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