एक बड़ा कैनवास है ऊपर, जहाँ रोज़ नया रंग भरता है,
आसमान वह कहलाता है, जहाँ धूप-छाँव का खेल रचता है।
कभी नीलिमा, कभी सतरंगी आभा से वह चमकता है,
सूरज चाचू बनकर रोज़, जग में उजियारा भरता है।
रात के अँधेरे में जब, कोई चाँद का रसगुल्ला रखता है,
मीठे सपनों से भरी नींद, वह आँखों में जो भरता है।
तनकर खड़ा है जो धरा पर, हरी चादर से खुद को ढकता है,
पेड़ वो कहलाता है, जो हमें जीवन-फल देता है।
झरनों की कल-कल ध्वनि में, जैसे कोई संगीत बजता है,
मन के कोने-कोने में, नया जोश वो भरता है।
ये सब जो तुम देख रहे हो, ईश्वर के अनमोल उपहार हैं,
सच में ये प्रकृति के, निराले और अद्भुत चमत्कार हैं।
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