आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बाल गणेश जी आएं..

                
                                                         
                            बाल गणेश का हुआ जन्म,
                                                                 
                            
जश्न में इनकी सब हुए मगन।
सब मिलकर इनको रिझाएं,
बाल गणेश जी आएं।
शिव पार्वती के ये लाल कहलाते,
मोदक इनके मन को भाते।
रुचि-रुचि सब भोग लगाएं,
बाल गणेश जी आएं।
देवों में प्रथम पूज्य कहलाते,
फूलों की सब वर्षा बरसाते।
सब मिलकर इनको मनाएं,
बाल गणेश जी आएं।
मूषक की ये करते सवारी,
विपदा हरते जग की सारी।
विघ्नहर्ता यह कहलाएं,
बाल गणेश जी आएं।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर