जी रहे सब उसके सहारे
ना तुम जीते, ना हम हारे
जी रहे हैं, सब उसके सहारे।
जो भी है उसका दिया है, क्यों करते हैं ,यह हमारे यह तुम्हारे ।
ना तुम जीते ना हम हारे,
जी रहे हैं सब उसके सहारे।
अपनी उड़ान का गुमान क्या करना,
मिला जो यश उसका अहंकार क्या करना।
ना तुम जीते ना हम हारे
जी रहे हैं, सब उसके सहारे
नहीं जिंदगी में किसी से शिकायत करना ,
हमें तो हर पल प्रभु का सुमिरन करना।
ना तुम जीते, ना हम हारे
जी रहे हैं सब उसके सहारे
-सुरेश सिरोहिया
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