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जी रहे सब उसके सहारे

                
                                                         
                            जी रहे सब उसके सहारे
                                                                 
                            

ना तुम जीते, ना हम हारे
जी रहे हैं, सब उसके सहारे।

जो भी है उसका दिया है, क्यों करते हैं ,यह हमारे यह तुम्हारे ।
ना तुम जीते ना हम हारे,
जी रहे हैं सब उसके सहारे।

अपनी उड़ान का गुमान क्या करना,
मिला जो यश उसका अहंकार क्या करना।
ना तुम जीते ना हम हारे
जी रहे हैं, सब उसके सहारे

नहीं जिंदगी में किसी से शिकायत करना ,
हमें तो हर पल प्रभु का सुमिरन करना।
ना तुम जीते, ना हम हारे
जी रहे हैं सब उसके सहारे
-सुरेश सिरोहिया
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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