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तेरी नज़र में बेमिसाल

                
                                                         
                            हज़ारों ख़ामियाँ हैं मुझमें,
                                                                 
                            
और मुझे इसका इल्म भी है,
न कोई गिला है ज़माने से,
न ख़ुद से कोई शिकवा है।

बस एक शख़्स है इस दुनिया में,
जो आज भी मुझे लाजवाब कहता है,
मेरी हर कमी में भी
वो मेरी कोई ख़ूबी ढूँढ़ लेता है।

लोग तो आईना दिखाकर चले गए,
उसने आँखों में प्यार रख दिया,
मैं ख़ुद को जहाँ अधूरा समझता रहा,
उसने वहीं मुझे मुकम्मल कह दिया।

शायद इसी को कहते हैं मोहब्बत—
जहाँ ख़ामियाँ भी ख़ूबसूरत लगें,
और एक शख़्स की नज़र में
हम उम्रभर बेहतरीन लगें।
-सुरेश
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2 घंटे पहले

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