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व्यक्तित्व का आईना

                
                                                         
                            हर हमेशा ,
                                                                 
                            
केवल - -
अपने शरीर पर ही,
ध्यान देने से - -
काम नहीं बनेगा ,
आप यदि डाक्टर या - -
बैद्य से दिखाते हैं,
या जांच कराते हैं - -
जो आपके शरीर में,
कमी होता हैं - -
उसे पूरा करवाते हैं ,
या पूरा करने के लिए - -
प्रेरित करते हैं l

इसी संदर्भ में
कभी - कभी - -
अपने ब्यक्तित्व का ,
रिपोर्ट बनाकर - -
खुद आत्साक्ष करना,
चाहिए - -,
या यों कहे तो,
आत्मसाक्ष जरूरी भी है l

सच में ,
आत्मसाक्ष करने से,
हमारे अंदर के गुण
ब्यक्तित्व या ब्यवहारिकता - -
का बोध,
हो जाता है - -
और,
दया - करुणा - -
मानवता - दोस्ती ,
इसके अतिरिक्त - -
ब्यवहारिकता और,
इंसानयत का भी - -
पता चल जाता है l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
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2 महीने पहले

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