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सुख -दुःख का साथी

                
                                                         
                            केवल सुख के,
                                                                 
                            
समय में नहीं - -
बुरे वक़्त या,
दुःख के घड़ी में - -
साथ निभाये,
सचमुच में - -
वही परिवार ,
होता है l

उदाहरण तोर पे ,
रमायण प्रसंग को - -
ले सकते हैं ,
जिसमें - -
कुम्भ करण ने ,
युद्ध में - -
जाने से पहले ,
रावण से बोला था - -
यदि मैं ,
रणभूमि या - -
युद्ध में ,
मारा जाऊँ तो - -
समझ ली जियेगा कि,
राम प्रब्रह्म परमेश्वर है - -
जिसे युद्ध में,
कोई हरा नहीं सकता - -
और आप,
भगवान राम के - -
शरण में जाकर ,
अपने परिवार या - -
कुल को नष्ट,
होने से बचा - -
लीजिएगा l

इस पर रावण ने ,
बहुत ही - -
खूबसून्दर,
जवाब दिया कि - -
जब तुम जैसे,
भाय ही नहीं रहेगा तो - -
तीनों लोको का,
राज -पाट - -
लेकर,
क्या करूँगा ?

प्राणी जब ,
परिवार के साथ - -
सुख भोग कर,
प्रसन्न या संतुष्ट रहता है - -
इसलिए ,
परिवार के साथ - -
केवल सुख भोगने के,
लिए खड़े मत - -
होना चाहिए,
अपितु - -
बुरे समय में भी,
खड़ा होना चाहिए l

सचमुच,
रावण के ये बात - -
आज भी l
प्रसंगिक है l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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