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निष्पक्ष प्रकृति

                
                                                         
                            सच कहे तो,
                                                                 
                            
हम किरदार है - -
या दूसरे शब्दों में,
कहे तो - -
रंगमंच का एक,
छोटा सा पात्र होता है - -
नेपथ्य से ,
गाइड या - -
निर्देशित करने ,
वाला तो - -
कोई और होता है l

सबकुछ ,
समय से - -
पहले ही ,
तय हो जाता है - -
इस संसार में ,
जब जहाँ - -
और जैसे ,
होना होता है - -
वह पहले से ही,
तय होकर - -
आता है l

कब किससे ,
मिलन होगा - -
कब विछुड़ जायेगा ,
सचमुच - -
यह अनिश्चित है ,
इसी संदर्भ में - -
कहा गया है कि,
कौन सहसा - -
मिल जायेगा,
विछुड़ेगा - -
कौन सहसा ,
आ परे - -
तू ना रुकेगा ,
केवल अपने - -
पथ का ,
पहचान कर ले l

यह भी ,
परम सत्य है कि - -
जो होनी है ,
उसे कोई भी - -
रोक नहीं सकता है,
जो आपसे - -
छूटने (विछुड़ने )वाला है ,
वो छूट कर रहेगा - -
चाहे संबंध ,
कैसा भी क्यों न हो?

नियत समय पर,
सब कुछ होता है - -
लकिन ताज्जुब ( आश्चर्य ) की,
बात यह है कि - -
प्रकृति ,
किसी घटना का - -
जिम्मेदारी,
अपने ऊपर - -
ना लेकर ,
ब्यक्ति विशेष को - -
मोहरा बनाकर ,
आपसे से वह - -
करवा लेता है ,
जो पहले से ही - -
तय होता है l

इसलिए ,
किसी ने - -
सच ही,
कहा है कि - -
इंसान तो ,
रंगमंच का एक - -
उम्दा पात्र या ,
केवल - -
किरदार होता है l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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