किसी ने ,
सच ही कहा है - -
अपने मन ,
की ब्याथा को - -
को मन में ही ,
रखना चाहिए - -
दूसरे के सामने ,
प्रकट करने से - -
लोग ,
इठलाते हैं - -
या यो कहिये ,
हीन भावना से - -
देखते हैं l
क्रमशः ,
कुछ विचारक ने ,
यहाँ तक - -
कह दिया है कि,
हर वक़्त - -
हर जगह ,
या हर किसी के - -
सामने ,
अपना दुखरा - -
हो सके तो ,
जितना जल्दी हो - -
बंद कर देना चाहिए,
क्योंकि ?
यहाँ कोई - -
आपके दुःख - दर्द ,
को समझने वाला - -
कोई नहीं है l
आप किस दौर से,
गुजर रहे हैं - -
यह किसी को ,
कोई - -
फर्क नहीं पड़ता है l
यदि आप,
समझते हैं कि - -
आपके दुखरा,
सुनकर ,
कोई मदद करेगा - -
लकिन,
ऐसा नहीं है - -
तुम्हें लोग ,
हीन भावना से - -
देखेंगे ,
और - -
इतना मजाक ,
करेंगे - -
आप मजाक के ,
पात्र बन जाएगें l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X