सचमुच ,
भर दिन - -
ब्यस्तम जिन्दगी,
रहता है - -
भाग -दौड़ ,
भरी जिन्दगी में - -
सहज या सुलभ,
या सुकून का -,-
दो पल की,
तलाश हर इंसान को - -
जरूर ही रहता है l
सच में ,
दिन के अवसान (अंत ) - -
होने के उपरांत,
लगभग - -
शोर -गुल,
या तो - -
खत्म हो जाता है,
या थम जाता है - -
एक मात्र,
सच ही बचता है - -
वो सच ,
आप खुद होते हैं - -
लोग आते जाते ,
रहते हैं - -
और ,
हालत - -
बनते - बिगरते है,
आप यथावत ,
बने रहते हैं l
यह भी ,
सच्चाई है कि - -
ये केवल ,
अकेलेपन का - -
केवल संदेश ही ,
नहीं देते - -
अपितु,
आत्मनिर्भरता का - -
सच्चा पाठ,
भी पढ़ता है l
आप स्वयं,
समझने लगते हैं - -
या समझ जाते हैं,
ये शानदार - -
जिंदगी रूपी महल का,
प्रमुख स्तम्भ - -
या नींव,
खुद आप स्वयं हैं l
इसलिए ,
समझ में - -
आ गया कि,
खुद पर ध्यान देना - -
कोई स्वार्थ,
न होकर - -
नितांत जरूरी भी है l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
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