पहली किरण,
कहती है - -
सुबह की ,
जरूरी भी है - -
थोड़ा थकना,
तभी तो कीमत - -
समझ में ,
आती है - -
मंजिल की l
हुनर सीख लो ,
गिरकर - -
उठने की,
क्योंकि ?
जीत उसी की - -
होती है ,
जो हार जाने के - -
बाद भी ,
मुस्कुराता रहता है l
आज का दिन,
कुछ नया कहेगा - -
या नया होगा,
अगर खुद से एक - -
वादा कर लो,
जब तक - -
सपने को,
सच न कर लो - -
रुकूंगा नहीं,
थकूँगा नहीं l
अंत में,
उठो चलो - -
मुस्कुराओ ,
और अपने - -
मुकाम पे,
चल पड़ो - -
क्योंकि ?
तुम्हारी कहानी ,
अभी भी - -
बाँकि ही है l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
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