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हरि इच्छा पर कुछ मत बोल

                
                                                         
                            पानी में जाने से पहले,भैया अपने बाजू तोल।
                                                                 
                            
पहले शब्दो को तोलो,फिर भैया मुहं से कुछ बोल।।
सारे तारे और जगत को,प्रभु ने यूं ही नही बनाया गोल।

जो कुछ दिया उस मालिक ने,सब कुछ है वो अनमोल।
समय किसी के साथ चला ना,आगे बढता जाता है ।
जो समय के साथ चला ना, पीछे वो रह जाता है।
नाजुकता की कर पहचान,समय देखकर चक्षु खोल।
जो होता वो अच्छा होता,हरि इच्छा पर कुछ मत

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले

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