भक्ति पथ पर बढ़ते जाएँ, हरि का नाम जपें।
मन के भीतर दीप जलाकर, प्रभु चरणों में झुकें।
माया-मोह के बंधन छोड़ें, सत्य राह को थामें।
प्रेम-स्नेह से हृदय सजाएँ, प्रभु को अपने मानें।
दुख आए तो धैर्य रखें हम,सुख में न इतराएँ।
हरि इच्छा को शीश नवाकर, जीवन सफल बनाएँ।
सेवा को ही धर्म समझकर,दीनों के दुःख हरें।
मीठे वचन और निर्मल मन से, सबके मन में उतरें।
नाम-स्मरण की मधुर ज्योति से, अंतरमन उजियारा।
भक्ति बने जीवन की नैया, हरि बनें खेवनहारा।
कर्म करें निष्काम भाव से, फल की चाह
न पालें।
संकट में भी विश्वास रखकर, प्रभु का नाम संभालें।
भक्ति पथ पर जो चलता है, वह कभी न घबराए।
हरि की कृपा मिले जिसको, भवसागर तर जाए।
मन-मंदिर में प्रेम जगाकर, चरणों में शीश धरूँ।
जन्म-जन्म तक हे मेरे हरि, आपकी भक्ति करूँ।
-सुनीता तिवारी"सरस"
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