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रुकना हमें आता नहीं

                
                                                         
                            जिधर भी हम चले,
                                                                 
                            
हवाएँ भी उधर चलीं,
पर्वतों ने झुककर कहा,
हम भी तुम्हारे साथ चले।

रास्तों ने लाख रोका हमें,
काँटों ने हर कदम टोका हमें,
हमने हँसकर इतना ही कहा,
इरादों ने कभी न रोका हमें।

सागर ने भी ललकारा था,
तूफ़ानों ने हमें पुकारा था,
हमने सीना तानकर कह दिया,
संघर्ष ही अपना किनारा था।

जो कठिनाइयों से लड़ता है,
वही इतिहास बदलता है,
गिरकर जो फिर उठ खड़ा हुआ,
वही जीत का हक़दार हुआ।

आँधियाँ भी राह बदलती हैं,
चट्टानें भी सिर झुकाती हैं,
जिनके इरादे फौलाद बन जाएँ,
तक़दीरें भी सलाम कर जाती हैं।

हम वो नहीं जो रुक जाएँ,
हालातों से डरकर झुक जाएँ,
तूफ़ानों के बीच भी हम,
अपनी मंज़िल खुद लिख जाएँ।

याद रखना ऐ दुनिया वालों,
जितना रोकोगे तुम हमको,
उतना ही निखरते जाएँगे,
इतिहास नया रच जाएँगे।
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3 महीने पहले

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