आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जब ईश्वर साथ खड़े होते हैं

                
                                                         
                            जब ईश्वर साथ खड़े होते हैं,
                                                                 
                            
तो काँटे भी फूल बने होते हैं।
लाख बिछा लो राह में काँटे,
सच्चे पथिक कहाँ रुके होते हैं।

धोखे की आँधी चलती रहे,
साज़िश की रात भी ढलती रहे।
कुछ पल सत्य भले चुप हो जाए,
पर झूठ की उम्र कहाँ चलती रहे।

जब भाग्य में ईश्वर लिखते हैं,
तो बंद द्वार भी खुलते हैं।
दुनिया चाहे जितना रोक ले,
सच्चे कदम कहाँ रुकते हैं।

कर्मों का दीप जलाए रखना,
सत्य का साथ निभाए रखना।
देर भले हो न्याय में लेकिन,
ईश्वर पर विश्वास बनाए रखना।

जो सत्य की राह पर चलता है,
वह गिरकर फिर भी संभलता है।
दुनिया चाहे भ्रम में रख दे,
ईश्वर सत्य स्वयं कहता है।

जब ईश्वर की कृपा हो जाती,
हर मुश्किल छोटी हो जाती।
झूठ भले कुछ पल मुस्काए,
अंत में जीत सत्य की होती जाती।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर