एक वक्त था जब हम लाखों थे कमाते
पीठ पीछे आज कर्जदार घर को क्यों हैं जाते
इस कदर ना सताओं दोस्तों इंसानियत के नाते
इज्ज़तदार है हम आपकी तरह किसी को नहीं हैं नचाते
माना की वक्त खराब है हमारा, हम नहीं
कोई रूठ जाए तो कोई गम नहीं
आज भी दोस्ती पर जान छिड़कते हैं हम
वक्त आने पर सब चुका देंगें या फिर हम नहीं
वक्त आ गया है हमारा ऊँची उड़ान का
जवाब देंगे आपके हर एक सवाल का
हम जैसे थे कल भी वैसे ही रहेंगे दोस्तों
याद रखों हमारा कहर है ना कमाल का
जमाना बड़ा मतलबी है फिक्र कहां सबको होती है
ऐसा क्या कर दिया हमने फिर क्यों मुसीबत होती है
वक्त हमारा आने दो दोस्तों नजारा हम दिखाएंगे सबको
फूटी है क़िस्मत हमारी साली बार - बार क्यों रोती है
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