किरदार नजरों का भी मायने रखता है
इनकी अदाओं से दिल रूबरू भी हो सकता है
इश्क़ है या बेरुखी है दिल में
जुबानी से जियादा इनसे बयां हो सकता है
चाहो तो आजमा लो मगर
आजमाने से ऐतबार भी खो सकता है
दो जाँ मिले इसमें अश्कों का क्या कसूर
बरस दिये जुदाई पर अब क्या हो सकता है
थोड़ा और करीब लाओ इस दरिया को
दिल के घाव देख ये थोड़ा और रो सकता है
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