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गाँव से ही देश बनेगा

                
                                                         
                            देश बदलना चाहते हो,
                                                                 
                            
पहले अपना द्वार सँवारो।
दीप जलाना है जग में तो,
पहले अपना घर उजियारो।
खेत हरे हों, प्यास बुझे तो,
नदियों का सम्मान करो।
जाति-धर्म की दीवारें छोड़ो,
मानवता का मान करो।
गाँव-गाँव जब जाग उठेगा,
भारत खुद मुस्काएगा।
मेहनत करने वाला हर जन,
अपना हक़ भी पाएगा।
कुर्सी वालों से क्या उम्मीद,
अब खुद जिम्मेदारी लो।
अपने हाथों अपना भविष्य,
सपनों की फुलवारी बो।
कल तुम्हारा, देश तुम्हारा,
अब यह समय पुकार रहा।
एक कदम तुम आगे बढ़ो,
पूरा भारत साथ खड़ा।
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3 महीने पहले

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