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अधूरा साथ

                
                                                         
                            गर होती तुम साथ, तो अपनी कहानी लिखता,
                                                                 
                            
वो याद पुरानी, वो रात सुहानी लिखता।

तुम थामती गर हाथ मेरा इक लम्हे को,
खुद को प्यासा, तुम्हें पानी लिखता।

ख़्वाहिश अगर होती तुम्हें जहाँ पाने की,
नाम तुम्हारे दुनिया की दीवानी लिखता।

गर होती तुझे रश्क मेरी वफ़ाओं से,
मैं खुद को तेरी ही गुलामी लिखता।

तू अगर चाहती बनूँ मैं दीवाना तेरा,
तुझे शराब, खुद को मैं शराबी लिखता।

गर पूछती दुनिया मेरी पहचान क्या है,
“साक़ित” मैं खुद को तेरी निशानी लिखता।
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3 महीने पहले

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