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"शुरुआत नई करते हैं"

                
                                                         
                            पतझड़ की हर इक शाख पर, फिर से बहार आएगी,
                                                                 
                            
जो खो गई थी रौशनी, वो लौट कर फिर आएगी।
धुंधला हो गया है रास्ता तो क्या, मंज़िल वहीं खड़ी है,
तेरी ज़िद के आगे आज, हर एक मुश्किल छोटी पड़ी है।

टूटे हुए धागों को जोड़कर, एक नया ख़्वाब बुनते हैं,
दुनिया की इस शोर में, ज़रा अपने दिल की सुनते हैं।
कायर बदलते हैं रास्ता, जब तूफ़ान सामने आता है,
वीर तो वो है जो तूफ़ान का भी रास्ता बदल जाता है।

"वक़्त का काम है गुज़रना, वो गुज़र ही जाएगा,
तू थामे रख अपना हौसला, तेरा दौर भी आएगा।
जो आज हँसते हैं तुझ पर, कल वो ताली बजाएंगे।"

मिट्टी की क्या औकात, जो बीजों को दबा कर रखे,
अंधेरे में भी वो हुनर है, जो सूरज को छुपा कर रखे।
तू भी फूटकर निकलेगा, एक दिन बड़ा दरख़्त बनेगा,
तेरी खामोशी का यह सफ़र, कल एक बड़ा शोर बनेगा।

तो चल, उठ खड़ा हो और एक नई शुरुआत कर,
जो बीत गया सो बीत गया, तू आज पर ऐतबार कर।
जीत का कोई शॉर्टकट नहीं, ये लंबा एक सफ़र है,
पर जो हार न माने कभी, वही असली सिकंदर है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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