ख्वाब सांसद बनने के
ख़्वाब सांसद बनने के पर मिले न कोई वोट।
रातभर भूखे करवट बदले खाई दिल पर चोट।
खाई दिल पर चोट ये कैसी किस्मत हमारी,
अगली साल जीतने की फिर से करी तैयारी।
वोट देने के लिए अब भी तैयार नही हुआ कोई,
मेरी ही मति मारी गई जो अपनी प्रतिष्ठा खोई।
अपनी प्रतिष्ठा खोई कोई सीधे बात न बोले,
ऐसे लगा जैसे कि कोई बरसाए बम के गोले।
लोगों का नज़रिया देख तब मेरा सिर भन्नाया,
गुस्से से चेहरा लाल तब मन को शांत कराया।
क्रोध की ज्वाला हुई शांत तब मन को समझाया,
चुनाव में खड़ा न होना मुझको अपना मन बनाया।
सुमन अग्रवाल "सागरिका"
आगरा
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