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इक ख़ूबसूरत ख़्वाब (ग़ज़ल)

                
                                                         
                            दिल में इक ख़ूबसूरत ख़्वाब मुद्दत से पला है
                                                                 
                            
उसकी यादों का चराग़ दिल में आज भी जला है

जिसे बरसों तसव्वुर में संजोया था मैंने
आज वही ख़्वाब इक ताबीर में ढला है

दिल की इस सूनी- सी बस्ती में बरसों बाद
उसकी आहट से कोई दर आज फिर खुला है

जिसने धूप की तपिश को भी हँसकर सहा
आज मेरे घर के आँगन में वही फूल खिला है

गिर के उठने का हुनर सीख लिया है सुल्तान
मेरे किरदार का पौधा इसी मिट्टी में पला है
-सुल्तान अली गहलोत
 
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2 महीने पहले

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