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मिलते ही रहे

                
                                                         
                            दाग़ महफ़िलों में मिले,
                                                                 
                            
ज़ख़्म मयखानों में हँसे,

हमको तोहफ़ा जो मिला
उनको दोस्त बनाने से मिले,

हम तरसते ही बरसते ही,
तरसते ही रहे,

हमसफ़र में हमसफ़र से,
सफ़र में उलझते ही रहे,

उनसे मिल जाते तो,
चाहत का आइना हटता रहे,

ज्यों आप तो लोगों के,
मिलने से मिलते रहे,

माँ की गोद में कल,
माँ की गोद में आज रहे,

हमको महफ़िल में ये दो
मेडल अफ़साने से मिलते रहे,

कभी भेजा था ख़त
कभी वो पढ़ते ही रहे,

एक नया ग़म मिला,
एक नई ख़ुशबू निहारते रहे,

जब ग़म-ए-सहर में तो
यार पहचानने से मिलते रहे
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2 घंटे पहले

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