कब आएगा मेरा सावन
कब रिमझिम बूंदें बरसेंगी
कब भावों के झूले होंगे
अरमानों के पेंग बढ़ेंगे
मल्हारों से सपने होंगे
कब महकेगा मेरा कानन
कब आएगा मेरा सावन
कब खनकेगा कंगना मेरा
कब चूनर में झिलमिल तारे
कब पांवों में रचे महावर
कब मेंहदी से हाथ रचाएं
कब सिंदूरी मेरा आनन
कब आएगा मेरा सावन
कब प्रियतम की बांह मिलेगी
कब पुरवा की सिहरन होगी
कब यादों से सजी देहरी
कब प्रीति की अक्षत होगी
कब गूंजेगा मन का आंगन
कब आएगा मेरा सावन
घटा घुमड़ घुमड़ कुछ कहतीं
बिजली कौंध कौंध कर आती
इंद्रधनुष कितने हैं नभ में
धरती पुलक पुलक क्यों जाती
क्यों खाली है मेरा दामन
कब आएगा मेरा सावन।
-सुधा गोयल
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