चलो दिन आज अपना भी मनाया जाए
पत्नी के लिए उपहार भी महंगा लाया जाए
जो कहते हैं कि किस्मत फूट गयी तुम्हें पाकर
चलो चलनी में आज मुंह उन्हें भी दिखाया जाए
सुन्दर वस्त्र भी उन्हें पहनाया जाए
व्रत में फल फ्रूट भी खूब खिलाया जाए
जहां हमारी एक ना चली आज तक उनसे भी आज छु-आया जाए
कल से फिर अपना रोज का काम किया जाए
पत्नी की हर बात को सर्वोपरि मान लिया जाए
जिस छलनी में दिखाई थी सूरत हमने अपनी
कल फिर उसी चलनी से आटा छान लिया जाए
-सुखप्रीत सिंह "सुखी "
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