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समाजिक लोग

                
                                                         
                            गलत को वे न गलत कहें
                                                                 
                            
न कह सकें विरोध में
किस प्रकार का जीवन है
बैठा कर शामिल हैं अपराध में

देख-देखकर स्थिति इनकी
आश्चर्य का भाव आता है
बनने लगे वे राष्ट्रीय गुरु जाने
किस विद्यालय से शिक्षा पाया है

गलत कर्मियों का वे साथ दें
गला घोंटते अच्छाई का
मुखौटा पहने समाज का
जाने कैसे पाखंड करें

हम जीवन जीते इनके भाँति
तो एक प्रश्न अवश्य आता
बुराई में जीवन जीके
कैसा मज़ा इनको आता
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41 मिनट पहले

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