सफलताएँ माँगती हैं कुर्बानियाँ अक्सर,
मुफ़्त में मिल जाए तो वो कामयाबी कैसी?
और जवानी हो तो सच बोलने वाली,
वरना ये चुप्पी रखने वाली जवानी कैसी?
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