पहली मुलाक़ात
आज भी याद आती है वो रात हमें…
जब हमारी पहली मुलाक़ात हुई थी…
कैसे झूठ बोलकर आए थे,
हम दोनों अपने घरों से…
तुम्हें डर था, जो तुमने हमसे बतलाया…
डर तो कहीं न कहीं हमें भी था,
जो शायद हमने छुपाया।
माना कि तुमने कहा था कि डर लगता है
तुम्हें ऐसी मुलाक़ातों से…
पर हमने भी तो कहा था कि संभाल लेंगे हम तुम्हें
अपनी बातों से…
थोड़ा तुम होश खो बैठे थे…
थोड़ी हमसे भी खता हुई थी।
आज भी याद आती है वो रात हमें…
जब हमारी पहली मुलाक़ात हुई थी।
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